जगदलपुर :- गोठानों में लगाए जाएंगे पौधे, रबर बोर्ड और उद्यानिकी विभाग के माध्यम से संचालित हो रही है योजना
बस्तर जिले में रबर की खेती के जरिए यहां के लोगों की आजीविका को बेहतर करने के लिए अब कवायद शुरू कर दी गई। कृषि महाविद्यालय और बास्तानार में की गई कोशिश के सफल होते देख अब जिले में रबर की खेती को बड़े पैमाने पर किए जाने की शुरुआत कर दी गई है।

इस योजना को सफल करने के लिए मंगलवार को कलेक्टर विजय दयाराम और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में सरगीपाल में ढाई हेक्टेयर जमीन पर 400 पौधे लगाए गए। इस मौके पर कलेक्टर विजय दयाराम के ने कहा कि आजीविका की एक मुहिम के लिए रबर प्लटिशन को बढ़ावा देने की 44 पहल बस्तर जिले में की जा रही है। यहां का वातावरण स्वर प्लटिशन के लिए उपयुक्त है। सरकार की मंशा है रबर जैसे व्यावसायिक उत्पाद को बढ़ावा देना है। इसके लिए इस साल योजना बनाकर इसका प्लटिशन किया जा रहा है। गौरतलब है कि बस्तर जिले में पिछले वर्ष डिलमिली क्षेत्र में और कृषि कॉलेज के परिसर में रबर प्लटिशन किया था, जिसका परिणाम काफी अच्छा रहा है। दोनों जगहों पर लगाए गए पौधों की ग्रोथ वैज्ञानिकों के हिसाब से सही है।

उद्यानिकी विभाग के मुताबिक ये रबर के पौधे आगामी दिनों में जिले के 22 गोठानों में लगाए जाएंगे। सात ब्लॉकों में संचालित होने वाले इन गोठानों का चयन कर लिया है। पौधों की देखभाल महिला स्वसहायता समूहों करेंगे। ज्ञात हो कि उद्यानिकी विभाग ने केवल उन गोठानों का चयन किया है जहां के महिला स्वसहायता समूहों ने रजामंदी दी है। इसके साथ ही सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। कलेक्टर ने कहा कि रबर के उत्पादन के लिए पौधारोपण का पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में सरगीपाल में किया। इसके अलावा रबर प्लटिशन के लिए सभी ब्लॉकों में जमीन का चिह्नांकन किया है। जिला प्रशासन रबर बोर्ड से जौ पौधे ले रहा है उसकी कीमत करीब 11 लाख रुपए है। उद्यानिकी विभाग को ये पौधे प्रति नग 110 रुपए के हिसाब से मिल रहे हैं।

बड़ी कंपनियां गांव में पहुंचकर खरीदेंगी रबर को
रबर की खेती में पौधे बड़े होने में लगभग पांच साल लगेंगे। इसके बाद हर वर्ष लाखों की आमदनी होने की संभावना है। इसलिए केंद्र सरकार की रबर बोर्ड इसके लिए भारतवर्ष में कार्य कर रही है। पौधे बड़े होने पर इससे निकलने वाले रबर की खरीदी के लिए कंपनियां आएंगी। गांव की चयनित जगह पर रबर पेड़ की खेती में ज्यादा से ज्यादा महिला समूह को जोड़ना है।
इसके अलावा स्वतंत्र व्यक्ति भी अपने खेत में रबर के पौधे लगा सकते हैं। कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अश्विनी ठाकुर ने कहा कि एक साल पहले कॉलेज परिसर में करीब दो एकड़ में 450 पौधे लगाए गए थे। अधिकतर पौधे करीब 5 फिट के हो गए हैं। बस्तर जिले में रबर की खेती के सफल होने के लिए हर तरह के साधन और संसाधन मौजूद हैं।
