बाड़मेर :- चपरासी से आयुक्त बने योगेश आचार्य ने बिना सामग्री बिलों पर परिषद के खजाने से किया भुगतान

विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले राज्य सरकार ने गांवों में भी इंदिरा रसोई खोलने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए बजट पंचायतीराज को आवंटित किया गया, लेकिन नगर परिषद ने 30 गांवों में इंदिरा रसोई को सामग्री भेजने के नाम 2-3 फमों के फर्जी बिल पेश कर करीब 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट उठा लिया।
इस घोटाले के समय योगेश आचार्य आयुक्त थे। ड्राइवर और चेहते लोगों की फर्म के बिल पेश कर यह गबन किया है। करीब एक माह पूर्व एसीबी ने योगेश आचार्य के 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद नए खुलासे हो रहे हैं। सवाल ये है कि इतनी बड़ी संख्या में राशि का गबन किए जाने के बाद भी नगर परिषद ने सरकार से इस फंड की डिमांड तक नहीं की। परिषद के खजाने से बंदरबांट की गई। बाड़मेर में कई बड़े घोटाले किए गए है, जिनके अब खुलासे होंगे।

इन 30 गांवों में खोलनी थी रसोई:राज्य सरकार ने 30 ग्राम पंचायतों में इंदिरा रसोई खोलने के लिए अगस्त 2023 में जिला परिषद को आदेश जारी किए। इसके बाद सितंबर में जिला परिषद ने टेंडर प्रक्रिया से सामग्री भेजने के अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। इनमें भाडखा, भादरेश, विशाला, चौहटन, गडरारोड, गुड़ामालानी, नोखड़ा, बाखासर, बुरहान का तला, धनाऊ, बायतु भोपजी, बाटाडू, गिड़ा, आडेल, सेड़वा, शिव, धोरीमना, रामसर, पायला कला, जसोल, पारलू, मंडापुरा, कल्याणपुर, पाटौदी, समदड़ी, करमावास, मिठौड़ा, पादरू, महिलावास, सिणधरी में इंदिरा रसोई खोली जानी थी।
रसोई को यह सामग्री सप्लाई देनी थी: विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले तत्कालीन गहलोत सरकार ने शहर की तर्ज पर गांवों में भी इंदिरा रसोई खोलने के आदेश दिए थे। इनमें हर रसोई के लिए कम्प्यूटर, वेब कैमरा, प्रिंटर, स्टील टेबल, स्टील बैंच, काउंटर टेबल, हलवाई टेबल, काउंटर कुर्सी, फ्रिज, मिक्सर ग्राइंडर, पंखा, चपाती वार्मर, सब्जी वार्मर व भगोला आदि खरीद कर इंदिरा रसोई को सप्लाई करना था। सप्लाई का आदेश जिला परिषद को मिला था और सामग्री भी जिला परिषद ने दी।
जिला परिषद ने टेंडर प्रक्रिया से इंदिरा रसोई सामग्री सप्लाई दी
शुरूआत में इंदिरा रसोई शहरी क्षेत्र में ही थी। ऐसे में सरकार ने चुनाव के समय आदेश नगर परिषदों को दे दिया। जब इसका विरोध हुआ तो इसके बाद इंदिरा रसोई की सामग्री सप्लाई और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दे दी। ऐसे में यह सामग्री भी पंचायतीराज यानि जिला परिषद को ही सप्लाई करनी थी। इसके लिए जिला परिषद ने अलग-अलग टेंडर जारी कर इलेक्ट्रॉनिक का सामान जेपी सिंहल, दीपक सेल्स जोधपुर, कैमरा सप्लाई का काम जैन सेल्स जोधपुर, बर्तन सप्लाई रतन इंटरप्राइजेज जोधपुर, फर्नीचर-स्टील सप्लाई का काम लक्ष्मी इंडस्ट्रीज जोधपुर को दिया।
नगर परिषद ने सप्लाई दी ही नहीं, फर्जी तरीके से करोड़ों उठाए
नगर परिषद में तत्कालीन आयुक्त योगेश आचार्य ने गांवों में इंदिरा रसोई खोलने के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान नगर परिषद के खजाने से कर दिया। जबकि इसके लिए सरकार ने कोई बजट ही नहीं दिया। इसके बावजूद सुंधा माता और अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी को गांवों में इंदिरा रसोई खोलने के लिए करीब 2 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। सुंधा माता कंस्ट्रक्शन कंपनी को 82447 रुपए के हिसाब से 36 बिल का 29.68 लाख रुपए पेमेंट किया है। इसी तरह अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी को 430518 के हिसाब से 16 बिल का 68.88 लाख रुपए पेमेंट किया है। इसके अलावा 86.10 लाख रुपए इसी फर्म को और पेमेंट किया गया है। अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी को 1.54 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। अगर जांच हो तो इस मामले में कई अन्य नाम भी सामने आ सकते है।
